बसंत उत्सव (नई दिल्ली)

बसंत उत्सवक उमंग, सखीबहिनपा के संग
              ऋतुराजक  बसंत के आगमनक उत्सव,प्राकृतिक सुन्दरताक मास, चहु दिश प्राकृतिक अनुपम छवि पसरल। अोहि बीच मोन में नव कामना संग नव कोपलक उत्पतिजकाँ नव विचार के उत्पति सेहो होइत अछि तें बसंत कवि लोकनिक पहिल पसंद रहलनि अछि।
त
 पहिल -कार्यक्रम छल कवियत्री गोष्ठी, जाहि में माँजल कवियत्री सब संग उभरैत कवियत्री सखी सबके सेहो स्थान देल गेल।
दोसर कार्यक्रम छल,-कला झलकसब सखी सब अप्पन मिथिलाक विभिन्न कला के प्रदर्शन केली अहि माध्यम सं जे बहुत मनोरम आ अद्भुत छल।
तेसर कार्यक्रम छल मैथिली नाटक-"हमर मैथिली"
जनगणना में अप्पन मातृभाषा मैथिली लिखू आ घर घरमें मैथिली बाजू एकर संदेश लेने छल इ नाटक
अंत में सखी सबके होलीगीत, नृत्य आ संगे धीआ-पूता के द्वारा राम सीता के रूपमें होलीनृत्य सबके होलीक रंग में रंगि देलक।
इ त छल स्टेजक कार्यक्रम मुदा अहि सबसं इतर सखीसब द्वारा लगाएल गेल मिथिलाक पकवान सभक  स्टॉल , विध- व्यवहार आ मिथिला के संस्कृति सँ सम्बन्धित वस्तु सभक स्टॉल
ततेक उत्साह सं लगेने छली जे पूरा परिदृश्य मिथिलामय भ गेल छल। आत्मविश्वासक संग, अपन  संस्कारक संग....
अंगद जकाँ सब अप्पन पैर जमा रहल छथि, अपन पैर पर ठाढ़ भऽ रहल छथि....।
छोट सन डेग,बढ़ैत डेग स्वावलंबन दिश।
जय मैथिली जय मिथिला