सखी- बहिनपाक संक्षिप्त परिचय
कोनो समाज/ राष्ट्र/ क्षेत्र तखने आगू बढ़ैत अछि जखन ओकर नारी समुदाय सेहो सरोकारक मुद्दापर आवाज़ उठा सकय। नारी समाज विश्व भरि दोसर दर्जा अथवा दबल रहली। कमोबेस इयह अवस्था मिथिलाक नारी के अछि। आर जगह त' नारी अपन पहचान बना रहल छथि मुदा मैंथिलानी अखनो उपेक्षित छथि। अपनापर विश्वासक कमी साफ देखाय पड़ैत छैक जखन कि मैथिलानी मेहनतमे ककरो स' कम नहि, विद्वतामे ककरो स' कम नहि, प्रबन्धन क्षमता किनको स' कम नहि इ साबित क' रहल छथि। कमी छल त' एकताक, विश्वासक जे सखी- बहिनपाक प्रयास स' आबि रहल अछि। सखी- बहिनपा मैथिलानी के अपनापर विश्वास, अपन क्षेत्रप्रति जागरूकता, अपन भाषाके सम्मान, मैथिलानीक आर्थिक आत्म निर्भरता...आदि के अपन मन्त्र बना चुकल अछि आ ओहि दिस डेग बढा चुकल अछि।
'सखी बहिनपा' मैथिलानी समूहक जन्म सन् 2015 मे फेसबुककेँ माध्यमसँ केलहुँ।मोन मे बहुत तरहक सवाल-जवाब चलि रहल छल जे कि इ समूह हमर मैथिलानी सखी-बहिनकेँ बीच अपन जगह बना सकत? कि इ समूह हमर सभक ओहि मूल उद्देश्य केँ पूरा करत जे हमर मोनमे उमरि-घुमरि रहल अछि? कि अपन पुरूष समाज एहि बदलाव केँ मोन सँ स्वीकार करताह?
मुदा आइ हम देखि रहल छी त' हमरा बुझि पड़ि रहल अछि कि जे शनै: - शनै: हम सब ओहि मूल उद्देश्यकेँ तरफ बढ़ि रहल छी, जाहि उद्देश्यकेँ लेल सखी बहिनपा मैथिलानी समूह बनाओल गेल छल। हमरा एहि बातक बड खुशी भ' रहल अछि जे सखी बहिनपा मैथिलानी समूह अपन मैथिलानी समाज मे उचित जगह बना रहल अछि आ आब एकर आधार बहुत व्यापक भ' गेल अछि। देश-विदेश सँ अनेकों मैथिलानी सखी एहि समूह सँ जुड़ल छथि आ समाज मे अपन महत्वपूर्ण स्थान बना रहल छथि। कखनो क' इहो मोनमे आबए जे कि अपन पुरूष समाज एहि बदलाव केँ मोन सँ स्वीकार करथिन? मुदा कहैत असीम हर्ष भ' रहल अछि जे पुरूष समाज इ बदलाव केँ स्वीकार केलखिन्ह बल्कि अपन घरक महिलाकेँ आगू बढ़बाक हेतु प्रोत्साहित केलथि। स्वयं हमरो इ कतेको बेर इ महसूस भेल जे पुरूष वर्ग बहुत सहयोग क' रहल छथिन्ह। हमरा सब सखी के लेल इ बहुत संतोषके बात अछि। आब हम सब निश्चिंत भ गेलहुँ जे यदि हम सब सखी अपन काज मोन सँ करी त' सामाजिक स्तर पर बहुत काज क' सकैत छी। सखी बहिनपा मैथिलानी समूह के किछु मुख्य उद्देश्य नीचा उल्लेख क' रहल छी :-
दरभंगा / मधुबनी में आयल बाढ़ि मे दीपा, ममता, स्नेहा, आरती सिंह दीदी, गीता दीदी, नीतू सखी आ अन्य स्थानीय सहयोगी सखी लोकनि सब आ पटना में आयल प्रलयकारी बाढ़ि में पाटलिपुत्रा सखी बहिनपा सब बहुत महत्वपूर्ण आ हिम्मत बला काज केलनि। यथासंभव घरे-घरे राहत-सामग्री पहुँचेलनि। सम्पूर्ण मिथिला मे मिथिलाक्षरक जोरदार प्रसार-प्रचार हेतु मनोरमा झा सखी, शिप्रा झा सखी, शैव्या झा सखी,बिभा दीदी सखी आदि महत्वपूर्ण बीड़ा उठेने छथि। सखी बहिनपा मैथिलानी समूह मे जुड़ल सब मैथिलानी सखी केँ मिथिलाक्षर सीखैक हेतु लगातार प्रेरित क' रहल छथि। प्लास्टिक छोड़ू अभियान अन्तर्गत किछु सखी जूट आ कपड़ा सँ बनल आ मिथिला पेंटिंग सँ युक्त झोरा के वितरण आ बिक्री में नेहा पुष्प सखी, श्वेता सखी आ शिखा ठाकुर सखी केँ योगदान अवर्णनीय अछि। असगरे शिखा ठाकुर सखी मुम्बई में ८००० झोरा केँ वितरण आ विक्रय केलनि।
हालमे १७ नवंबर, २०१९ केँ दिल्ली सखी बहिनपा मैथिलानी समूह द्वारा मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकारक सहयोग सँ “मिथिला मेला” केँ आयोजन कयल गेल छल। एहि आयोजन में हमहुँ शामिल भेल रही। एहि आयोजन केँ सफल बनबय में हमर सम्पूर्ण दिल्ली सखी बहिनपा के "कार्यकर्ता" सखी के अलावा ओहिठामक सब सखी के योगदान महत्वपूर्ण अछि।छाया सखी,सांत्वना सखी,मधुलता सखी,हेमा सखी,स्वाति सखी, पूजा सखी,रेखा सखी,राधा सखी,गिन्नी दीदी सखी,सौम्या सखी,शिप्रा सखी,कामना सखी,भारती सखी..... आदि के विशेष आभार।विश्व भरि के सखी सभक शुभेच्छा संग छल। लगातार पोस्ट द्वारा ओ सब दूर रहितो अपन उपस्थिति बनेने रहथि।कोनो एक दिनक नहि, बहुत दिनक अथक परिश्रम के परिणाम छल एकर सफलता। एकर सुखद परिणाम १७ नवंबर, २०१९ केँ नजरि आयल।अबितै कोना नहि? अपना घर के परोजन जकाँ एकरा हमर सखी सब सम्हारलीह। एहि मेला में मैथिल खान-पान, मिथिला पेंटिंग आ मैथिली तथा मिथिलाक्षरक पोथीकेँ स्टॉल,मिथिला दर्शन के कांसेप्ट(डाला सँ सजल मैथिल परंपरा के दर्शाबैत बिध/व्यवहार) के डाला सँ सजल छल। एहि मेला मे जबरदस्त भीड़ छल आ भीड़ छल ओहि विश्वास के जे अहाँ सब मैथिल जन हमरा सब सखी बहिनपा पर कयलथि ।
हमर सखी सब आत्मनिर्भर भ' रहल छथि... अपन अपन स्टाल पर पूरा आत्मविश्वासक संग जाहि तरहे ओ सब व्यवस्थापन क' रहल छलीह ओ एकटा सुखद अनुभूति छल।
धिया-पूता सब अरिपन, गीत, नृत्य, मिथिला चित्रकला के प्रतियोगितामे भाग लेलथि बड्ड नीक लागल आ आश्वस्त भेलहुँ जे अपन मिथिला के मान हमर बच्चा सब अपन कन्हा पर उठा रहल छथि आ एकरा आगू बढ़ेताह।
मैथिली गीत नाद आ ज्योति सखी संग पूरा टीमक(मैलोरंग) जे नाटक के प्रस्तुति(मैथिल स्त्री) छल ओ चारि चान लगा देलक कार्यक्रममे।
सखी- बहिनपा द्वारा ठाम- ठामपर भ' रहल मिथिला मेला मिथिलामे परिवर्तन आनत इ पूर्ण विश्वास अछि । उत्तरी मिथिला(नेपालक) के सखीसभ सेहो आगू ऐतिह कियाक त' कतहु' के मैथिलानीमे प्रतिभा के कमी नहि ।
सुखक बात जे मीडिया मिथिला/ मैथिनी के कवरेज करय स' परहेज करैत रहथि ओहो आब मैथिलानीक महत्व बुझि रहल छथि आ सहयोग क' रहल छथि।
सखी- बहिनपा एहन फुलबारी थिक जत' सिनेह, ज्ञान, परम्परा आ आधुनिक दृश्टिकोण के समागम भेटैत अछि।
काल्हि मैथिलीके थिक, मिथिला के थिक आ ओ काल्हि आनय मे सखी- बहिनपाक महत्वपूर्ण योगदान रहत से हमरा सभक विश्वास अछि।
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सखी बहिनपा मैथिलानी समूह के किछु मुख्य उद्देश्य नीचा उल्लेख क' रहल छी :-
१. नारी सशक्तिकरण, मैथिलानी के आर्थिक निर्भरता ।
२. घर मे मैथिली के प्रयोग ।
३. शिक्षा मे मैथिली भाषा केँ प्रयोग ।
४. जनगणना में भाषा केँ रुपमे मैथिली लिखायल जाय ।
५. मिथिलाक मीडियामे मैथिली भाषा केँ अधिकसँ अधिक प्रयोग कयल जाय ।
६. मैथिलानीक एकता,
'सखी बहिनपा' मैथिलानी समूह जन्म
आइसँ चारि वर्ष पहिने सन् 2015 मे फेसबुककेँ माध्यमसँ केलहुँ।मोन मे बहुत तरहक सवाल-जवाब चलि रहल छल जे कि इ समूह हमर मैथिलानी सखी-बहिनकेँ बीच अपन जगह बना सकत? कि इ समूह हमर सभक ओहि मूल उद्देश्य केँ पूरा करत जे हमर मोनमे उमरि-घुमरि रहल अछि? कि अपन पुरूष समाज एहि बदलाव केँ मोन सँ स्वीकार करताह? मुदा आइ हम देखि रहल छी त' हमरा बुझि पड़ि रहल अछि कि जे शनै: - शनै: हम सब ओहि मूल उद्देश्यकेँ तरफ बढ़ि रहल छी, जाहि उद्देश्यकेँ लेल सखी बहिनपा मैथिलानी समूह बनाओल गेल छल। हमरा एहि बातक बड खुशी भ' रहल अछि जे सखी बहिनपा मैथिलानी समूह अपन मैथिलानी समाज मे उचित जगह बना रहल अछि आ आब एकर आधार बहुत व्यापक भ' गेल अछि। देश-विदेश सँ अनेकों मैथिलानी सखी एहि समूह सँ जुड़ल छथि आ समाज मे अपन महत्वपूर्ण स्थान बना रहल छथि। कखनो क' इहो मोनमे आबए जे कि अपन पुरूष समाज एहि बदलाव केँ मोन सँ स्वीकार करथिन? मुदा कहैत असीम हर्ष भ' रहल अछि जे पुरूष समाज इ बदलाव केँ स्वीकार केलखिन्ह बल्कि अपन घरक महिलाकेँ आगू बढ़बाक हेतु प्रोत्साहित केलथि। स्वयं हमरो इ कतेको बेर इ महसूस भेल जे पुरूष वर्ग बहुत सहयोग क' रहल छथिन्ह। हमरा सब सखी के लेल इ बहुत संतोषके बात अछि। आब हम सब निश्चिंत भ गेलहुँ जे यदि हम सब सखी अपन काज मोन सँ करी त' सामाजिक स्तर पर बहुत काज क' सकैत छी।
'सखी बहिनपा समूह' शुद्ध क' क' मैथिलानी लोकनिक संगठन अछि. एकर बाढ़िक समय मे कएल गेल सहाय्य कार्य हमरा सन अनेक लोकक ध्यान घिचने छल.
शुद्ध गैर व्यावसायिक, मुदा अंदर सँ अनुशासित जे एकर कोरोना-काल मे मिथिला चित्रकला सँ युक्त मास्क-निर्माण कार्य भेल अछि, ओ भारतक प्रधानमंत्री धरिक ध्यान अपना दिस घिचलक अछि.
वस्तुतः ई मैथिलानी सभक जागरण लेल स्वयं मे एक विरल संस्था अछि. आइ ई अपन स्वतंत्र वेवसाइट लॉन्च करय जा रहल अछि. हमर अशेष शुभकामना...
आरती के सखि बहिनपा के अविरल धार काठमांडू , पशुपतिनाथ सँ शुरू भेल आय नेपाल सँ भारतक कोन कोन में पसरि गेल , जेना हिमालय से निकलैत कतेको सुरसरि धार , निर्मल नीर पावन ,,ई अनुभूति हमरा तखन भेल जखन हम पटना , हिन्दी साहित्य सम्मेलनक स्वर्ण सम्मान लेबा लेल गेल छलौं
कार्यक्रमक एक टर्म खत्म भेल छल हम ककरो सँ गप्प करैत रही कि अचक्के एक झुंड मुस्कियावैत , ठिठियावैत सखि बहिनपा के झुंड घेरि लेलक ...हम सब सखि बहिनपा छी ..कतेक देर से अहाँके खोजि रहल छी ,, खुशी सँ हमरो मन गदगद भ गेल ...एतेक प्यार एतेक प्यार ..लगैत छल जेना देह से आत्मा में प्रवेश भ गेल हो क्षणे में ....
मैथिली भाषा ले आरती के बड़का योगदान , नारीक अस्तित्व लेल , नारीक व्यक्तित्व के अपन चिन्हार दियावैत , चूल्हा सँ निकलि , बाहरो काज करैत स्त्री समाज मे अपन योगदान दैत सौंसे परिवार के समेटने ,,ई नारिये सँ सम्भव ,नारी धरती होइत अछि । हम मिथिलाक नारी छी , ठाम पर फूल ठाम पर चिंगारी छी।
"सखी बहिनपा मैथिलानी समूह"
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’, जे स्वयं एक मैथिल छलाह, अपन पोथी ‘रश्मिरथी’ केँ शुरुआत अधोलिखित पंक्ति सँ कएने छथि:
'जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,
जिस नर में भी बसे, हमारा नमन तेज को, बल को।
किसी वृन्त पर खिले विपिन में, पर, नमस्य है फूल,
सुधी खोजते नहीं, गुणों का आदि, शक्ति का मूल।
राष्ट्रकवि दिनकर जीक इ काव्यांश सखी बहिनपा: मैथिलानी समूह केँ संस्थापिका बहिन श्रीमती आरती झा केँ लेल सटीक बैसि रहल अछि। सोशल मीडिया “फेसबुक” केँ माध्यम सँ बनल इ समूह समस्त मैथिलानी केँ एकीकरण करबाक अद्भुत प्रयास अछि। इ समूह अपन मातृभूमि मिथिलाक लोक-संस्कृति, पारंपरिक आ सांस्कृतिक धरोहरके संरक्षण हेतु समर्पित अछि। पुरुषप्रधान समाज मे एहि तरहक प्रयोग अद्भुत छल। चाहे देश-विदेशक महानगर हो, मिथिला के कुनो छोट गाँव मे रहैत मैथिलानी, सब एहि समूह सँ जुड़ि अपन विचार केँ आदान-प्रदान कऽ रहल छथि जाहि सँ हिनकर सभक छुपल प्रतिभा सभक सामने आबि रहल अछि।
आभासी दुनिया सँ निकलि इ समूह आब वास्तविकताक धरातल पर सेहो स्थापित भऽ चुकल अछि आ अपन सामाजिक काज सँ लगातार चर्चा मे बनल रहैत अछि। चाहे ओ प्राकृतिक विपदाक समय हो या सामाजिक स्तर पर महिलाक आत्मसम्मान के रक्षार्थ काज, इ समूह हमेशा तत्पर रहैत अछि। नवतुरिया मैथिलानी, जे एखुनका समय में अपन परंपरा सँ दूर भेल जा रहल छलथि, एहि समूह केँ माध्यम सँ फेर सँ अपन संस्कृति सँ जुड़ि रहल छथि। ई मंच आब एकटा विशाल वटवृक्ष बनि चुकल अछि जिनकर छाँह मे मैथिल नारि अपना केँ सहज आ सुरक्षित महसूस कऽ रहल छथि आ अपन शक्ति केँ एहसास संपूर्ण समाज केँ करबा रहल अछि।
एतबे नहि, मिथिलाक एहि मातृशक्तिक झुकाव आब अपन लिपि, मिथिलाक्षरक संरक्षण आ संवर्द्धन हेतु भऽ चुकल अछि। मिथिलाक्षरक प्रचार-प्रसार मे प्राणपन सँ लागल, "सिद्धिरस्तु - मिशन मिथिलाक्षर लिपि" सँ हालहि मे औपचारिक सहभागिता कऽ मिथिलाक्षरक उत्थानक प्रयास करब - सखि-बहिनपा: मैथिलानी समूह केर दूरदर्शी सोच अछि। एहि मणि-काञ्चण संयोगक सूत्रधार बनलथि बहिन श्रीमती मनोरमा झा जे, दुनू संस्था केँ अपन अथक प्रयास सँ शिखर पर लऽ जेबाक सत्प्रयास मे अहर्निश लागल रहैत छथि। स्वयं बहिन श्रीमती आरती झा सपरिवार मिथिलाक्षर सीखलनि। देखल गेल अछि जे मैथिल नारि, मिथिला केँ लोक-संस्कार, लोकगीत आदि केँ वाहक छथि ताहि कारणे, सिद्धिरस्तु-मिशन मिथिलाक्षर लिपि केँ संस्थापक अध्यक्ष होइक नाते हमरा विश्वास अछि जे मिथिलाक्षर लिपि जरुर अपन मिथिला मे पसरि जायत।
आशा नहि, अपितु पूर्ण विश्वास अछि जे जगत जननी जानकीक असीम अनुकम्पा सँ मैथिलानीक ई लोकप्रिय समूह अपन हरेक पावन उद्देश्य मे अवश्य सफल होयत ।
।। जय मिथिला, जय मैथिली, जय मिथिलाक्षर ।।
निरंतर पलायनवादी होइत मैथिल अपन भाषा, लिपि, संस्कृति, लोक-कला, लोक-संगीत, चित्रकला, पाबनि-तिहार, बिध-व्यवहार केँ जीवंत कोना राखल जाय इ एक टा पैघ समस्या बनि गेल अछि। मिथिलाक संस्कृति केँ अखन धरि मैथिलानी अपन गीतनाद आ विध-व्यवहार सँ बचांकें रखने छथिन मुदा नवतुरिया मैथिलानी सभ दिनानुदिन अहि सँ दुर होइत जा रहल छलीह। आजुक व्यस्तम समयमे अपन संस्कृति सँ जुरल रहब सभक लेल एक टा चुनौती अछि। एहना सन स्थितिमे जनकनंन्दनी जानकी स्वरुपा श्रीमती आरती झा सखि-बहिनपा (मैथिलानी समूह) केँ स्थापना कऽ मैथिलानी सभक लेल एक टा नीक आ मजबूत प्लेटफ़ॉर्मक निर्माण कऽ देने छथिन जतय मैथिलानी अपन प्रतिभा केँ अपना अनुसार प्रदर्शित कऽ सकैत छी। कतेको मैथिलानी मिथिला पेंटिंग, गीत-नाद, लोक- नृत्य इत्यादिक प्रशिक्षण लऽ रहल छथिन आ अपन प्रदर्शनसँ देश-विदेशमे नाम कऽ रहल छथिन। मैथिलानीक विशाल आ अद्भुत समूह सखी-बहिनपा (मैथिलानी समूह) सांस्कृतिक संरक्षण, संवर्धन, उत्थानक लेल मीलक पाथर सिद्ध भेल जा रहल अछि। फेसबुक केँ माध्यम सँ कमे समयमे लगभग २९ हजार सँ बेसी मैथिलानीक इ समूह अपन नामक डंका विश्व भरिमे बजा रहल अछि। श्रीमती आरती झा आ हुनक टीमक मेहनत आ कुशल नेतृत्वक कारण इ सम्भव भऽ सकल अछि। गाम, छोट-छोट शहर, महानगर वा देश-विदेश हर ठाम सखी बहिनपा समूह आई आधुनिकता व परम्पराक अनुपम समावेश करैत विभिन्न कार्यक्रमक आयोजन कऽ नित्य नव-नव किर्तिमानक इतिहास लिख रहल अछि। विगत वर्ष बाढ़ि प्रभावित लोकक मदद लेल सखि-बहिनपा टीमक काज सराहनीय अछि। अतवे नहि, विलुप्त होइत मिथिलाक्षरक संवर्धन आ संरक्षण लेल सेहो सखि-बहिनपा समूह अभूतपुर्व काज कऽ रहल अछि। सिद्धिरस्तु-मिशन मिथिलाक्षर लिपि संस्था संग गठजोड़ कऽ मिथिलाक्षरक इ पाठशालाक वरिष्ठ प्रशिक्षिका श्रीमती मनोरमा झा (सखि बहिनपाक एडमिन) केँ नेतृत्वमे सखि बहिनपा सँ जुरल पांच सय सँ बेसी मैथिलानी मिथिलाक्षर प्रबोध भऽ गेलीह अछि आ बहुतों प्रशिक्षिका रुपमे अपन उल्लेखनीय योगदान दऽ रहल छैथ। मिथिलाक्षरक संरक्षण आ संवर्धन लेल श्रीमती आरती झा आ श्रीमती मनोरमा झा केँ आहृवान पर इ सम्भव भऽ रहल अछि। सखि बहिनपा सँ जुरल समस्त मैथिलानी मातृशक्ति केँ हमर नमन आ शुभकामना।
कहल जाइछ जे परिवर्तन एहि संसारक शाश्वत सत्य थिक । आजुक समय मे सूचना क्रांतिक बदौलति दुनिया मे परिवर्तनक गति बहुत तेज भऽ गेलैये । सुखद बात ई जे एहि परिवर्तन सँ अन्य बदलाव केर संग-संग कएकटा अद्भुत प्लेटफाॅर्म केर प्रादुर्भाव सेहो भेलैये । “वसुधैव कुटुम्बकम”, उक्ति केँ सार्थक करैत फेसबुक सहित अन्यान्य सामूहिक संजाल सन प्लेटफाॅर्म केर निर्माण भेल । एहि सँ "संपूर्ण विश्व - एक ग्राम” केर परिकल्पना साकार भए रहल अछि । एहि अद्भुत प्लेटफाॅर्म केर सदुपयोग करैत समाज मे बहुत रास सकारात्मक बदलाव आनल जा रहल अछि ।
एहने एकटा बदलावक अभिनव प्रयास मिथिलाक धिया लोकनि सेहो कए रहलनि अछि । एहि प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय प्रयासक फलस्वरूप एकटा सर्वसुलभ मंच केर आविर्भाव भेल । ओहि मंचक नाम थिक - "सखि-बहिनपा (मैथिलानी समूह)" । एहि मंचक परिकल्पना मैथिल ललना, श्रीमती आरती झा द्वारा भेल आ’ हुनक सत्प्रयास सँ एहि यशस्वी मंचक स्थापना कएल गेल । स्थापनाक किछुए दिनक बाद एहि मंच सँ मिथिला सहित विश्वक अनेक भूभाग सँ मिथिलाक ललना सभ जुड़ैत चलि गेली आओर ई मंच एकटा विशाल वटवृक्षक रूप धारण कएल।
वर्तमान मे ई मंच अनेक तरहक सामाजिक आ सांस्कृतिक गतिविधि मे संलग्न भए समाजक कल्याण/उत्थान मे लागल अछि । ई देखि मोन हर्षित होयब स्वाभाविक छैक, जखन, एहि समूह द्वारा मिथिलाक धरोहर, यथा, लोक-कला (मिथिला - पेंटिंग, पारंपरिक गीत-नाद एवं कुटीर उद्योग), लोक-नृत्यादिक संरक्षण एवं सवर्द्धन केर अथक प्रयास होइत देखैत छी । अपन अमूल्य एवं गरिमामयी धरोहरक रक्षा करैत मिथिलाक मातृशक्ति केँ स्वालंबी कोना बनाओल जाय, तकर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कए रहल अछि - "सखि-बहिनपा (मैथिलानी समूह)" । अनेक मैथिल ललना एहि समूह सँ जुड़ि केँ नहि मात्र आर्थिक रूपेँ संबल बनि रहल छथि, अपितु, अपन संस्कृतिक संवाहिका सेहो बनि एकटा आदर्श उपस्थित कए रहल छथि ।
एतबे नहि, किछु दिन पूर्व ई देखि एकटा नव आश जागल जखन मिथिलाक मातृशक्तिक झुकाव अपन लिपि, मिथिलाक्षरक संरक्षण आ’ संवर्द्धन हेतु देखल । मिथिलाक्षरक प्रचार-प्रसार मे लागल अनेक अभियान मे सँ एक, "सिद्धिरस्तु - मिशन मिथिलाक्षर लिपि" सँ औपचारिक सहभागिता कए मिथिलाक्षरक उत्थानक प्रयास करब - "सखि-बहिनपा (मैथिलानी समूह)" केर दूरदर्शिता केँ परिलक्षित कए रहल अछि । एहि मणि-काञ्चण संयोगक सूत्रधार बनलथि बहिन मनोरमा झा जे, दुनू संस्था केँ अपन अथक प्रयास सँ शिखर पर लऽ जेबाक सत्प्रयास मे अहर्निश लागल रहैत छथि ।
आशा नहि, पूर्ण विश्वास अछि जे जगत जननी जानकीक असीम अनुकम्पा सँ मैथिलानीक ई लोकप्रिय समूह अपन उद्देश्य मे सफल होयत ।
।। जय मिथिला - जय मैथिली ।।
"सखी बहिनपा मैथिलानी समूह" ...
प्रगतिशील व सकारात्मक सोच सं आभूषित शिक्षित आओर स्वाभिमानी मैथिल मातृशक्ति लोकनिक फेसबुक द्वारा बनल इ समूहक अछि । नाम सुनिते मात्र मोन आदर व भाव सं प्रफुल्लित भऽ उठैत अछि ।
अपन मातृभूमि मिथिला, हिनक संस्कृति,संगीत, कला, लिपि, भाषा, साहित्य, पावैन त्यौहार संग संग अनेक सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण,संवर्धन आओर पुनरुत्थान लेल समर्पित मैथिलानीक एहन अद्भुत समूह अपना आप मे अद्वितीय अछि ।
पुरुषप्रधान समाजिक व्यवस्था हो या रूढ़िवादी परम्परा, सत्य तऽ इ देखल आ सुनल अछि जे आपसी जान पहिचान तऽ दूर , स्त्री लोकनि जीवनक अधेर उम्र धरि अपन आंगनक सीमा सं बाहर तक नहि जा पावैत छलीह ।
लेकिन सूचनाक्रांति व फेसबुक के वरदान सं "सखी बहिनपा मैथिलानी समूह " एहन तरहक हर एक अवरोध के एकदम सं समाप्त कऽ देलक ।
आई विश्व के विभिन्न स्थान पर पसरल हजारो हजार मैथिलानी लोकनि घर बैसल बिना कोनो खास खर्च ,परिश्रम ,व परेशानी के, मात्र अपन हाथक मोबाइलक माध्यम सं स्नेह व आदर संग समूहक सुत्र मे जुड़ि जाइत छथि, जकरे परिणाम अछि जे वर्तमान मे इ विशाल व विहंगम समूह अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मे पुष्पित व पल्लवित भऽ रहल अछि ।
हम एहि अनुपम समूह के एक आंदोलन बल्कि "साइलेंट रिवोल्यूशन" के रूप मे देखैत छी ।
अपन अतेक छोट समय के जीवन यात्रा के क्रम मे SBMS अनेक मीलक पाथर स्थापित करबा मे सफल भऽ चुकल अछि । नारी सशक्तिकरणक क्षेत्र मे एहि समूहक भूमिका अद्वितीय भऽ रहल अछि। गांव हो शहर हो या पैघ नगर , देश हो या विदेश हर जगह मैथिलानी लोकनि आपस मे मेल मिलाप संग स्थानीय स्तर पर मिथिला सं जुरल अनेक तरहक कार्यक्रम करैत रहैत छथि जाहि सं आपसी सामंजस्य व प्रेम संग संग अपन छुपल प्रतिभा व कौशलता के बाहर निकालबाक अवसर सेहो प्राप्त करैत छथि ।
अतबे नहि , देखल जा रहल अछि जे प्राकृतिक विपदाक समय या ऐहि महामारीक संकट मे SBMS के सदस्य सब पीड़ित लोकक बीच अपन संसाधन सं यथासाध्य सहयोग अवश्य करैत रहैत छथि सफलता अपेक्षा के जन्म दैत छैक ।
एक मैथिल व प्रसंशक के नाते हमहूँ अपेक्षा करैत छी जे भविष्य में इ समूह समाजिक स्तर पर महिलाक आत्मसम्मान , शिक्षा लेल, रोजगार लेल , समूह तटस्थ रहि जमीन पर अपन क्रियाकलाप क खूशबू संग कार्य करय आ यश प्राप्त करय ताहि सं समाज आओर सुन्दर बनि सकय।
अखन अतबे ।
"सखी बहिनपा मैथिलानी समूह" के सब सदस्य के नमन संग बहुत बहुत मंगलकामना प्रेषित करैत छी ।
आभार ।
आनन्द जी झा
प्रवक्ता (अंग्रेजी)
शिक्षा निदेशालय
दिल्ली सरकार ।
जहिया आरती झा सखी द्वारा सखी-बहिनपाक नान्हि टा गाछ रोपल गेल आ स्नेहक जल सँ ओकरा पटाओल गेल छल त प्रायः कियो सोचनहु ने छलहुँ जे ई एकटा विशाल वृक्ष क रुप लेत मुदा जखन कतेको सखी सभक स्नेहिल हाथक खाद पानि वृक्ष के भेटल त'ओ सघन सँ सघन होइत गेल ।आब त'एकर शीतल छाँह मे सखी बहीनपा सब मीलिअपन मोनक बात एक दोसर सँ क 'सकै छी।अपन मिथिला क संस्कृति ,मातृभाषा स्वावलंबन क मादें चर्चा- अर्चा करबा मे सक्षम छी।
जखन समूह प्रकाश मे आएल त कखनो कखनो आलोचना क शिकार सेहो भेल मुदा तकर परवाह केने बिना समूह आगू बढैत गेल।मैथिलक जे मंच सब स्त्रीगण नाममात्र उपस्थिति क कारणे झुझुआन बुझाइ छल से समूहक सखी सबसँ जगजियार हुअ लागल। वास्तव मे कही त एकटा क्रांति अनलक ई समूह।
निसंदेह समूह के प्रोत्साहित करबा मे पुरुषो सभक योगदान सराहनीय कहल जा सकैयै। हमरा विशवास अछि भविष्य मे जखन मिथिलाक इतिहास लिखाएत सखी-बहिनपा मैथिलानी समूहक अध्याय अवश्य जोड़ल जैत आ से महत्वपूर्ण ढंगें।
बढैत डेगक क्रम मे आब समूहक अपन बेवसाइट लाँच होम' जा रहल अछि जे सुखद अछि।हमर अजस्र स्नेह आ शुभकामना समूहक प्रत्येक सखी के।
डॉ रानी झा
मिथिला चित्रकलाकेँ प्रतिष्ठित कलाकार।
सखि बहीनपा ग्रुप स्त्री लेल एकटा वरदान के रूप में स्थापित भ रहल अछि।स्त्री के स्वाबलंबी आ कला निष्णात बनाबय स ल क मैथिली भाषा के विकास आ संरक्षण के लेल अद्भुत प्रयास हमर आरती सखि क रहल छथि।ई ग्रुप अहिना दिन दुन्ना राति चौगुन्ना तरक्की करय।हम रंजना झा ग्रुप के सब सखि सदस्या लोकनिकें हार्दिक शुभकामना संग बधाई द रहल छी।
हमरा ई जानि प्रसन्नता भेल अछि जे सखी-बहिनपा समूह/संगठन लगातार पांच बर्ष सं काज क'रहल अछि।विश्व भरिमे पसरल हजारों मैथिलानी के एकजुट क'मैथिली भाषा ओ संस्कृति, कलाक संरक्षण हेतु निरन्तर एहि समूह द्वारा कार्यक्रम आयोजित होइत अछि।
वर्तमानमे अपन सदस्यलोकनिकें मैथिली भाषाक शिक्षण हेतु योजनाबद्ध रूपसं आनलाइन प्रशिक्षण-कार्यक्रम सेहो आरंभ कयल गेल अछि।एहि प्रकारक अभियान/कार्यक्रम सभक हम स्वागत करैत छी।सखी-बहिनपा समूहक कार्यकलाप बहुत उत्साहबर्द्धक अछि।ई क्रम जारी रहय ।एहि अवसर पर एक अनुरोध सेहो होयत जे एकर सदस्यलोकनि दुर्गापूजाक अवसर पर मैथिली भाषाक कोनो एक पोथी आ एक पत्रिका अपन पसिन्न सं खरीद करथि
हम सखी-बहिनपा समूह/संगठनक प्रत्येक सदस्यक प्रति शुभकामना व्यक्त करैत छी।
ई प्रसन्नताक विषय थिक जे 'सखी बहिनपा'पाँच बरखक भ' गेलीह।ई सुखद सेहो लगैए जे विशुद्धतः मैथिलानी द्वारा स्थापित व संचालित ई समूह कही वा संगठन, निरंतर मिथिलाक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पक्षक संवर्द्धनमे लागल अछि।आइ सगर संसारमे एकर सुवासक अनुभव कएल जा सकैए।
'सखी बहिनपा' एहि अवधारणाकेँ चरितार्थ करएमे लागल अछि जे 'नारी अबला नहि सबला छथि'।आशा करैत छी जे आबएवला समयमे ई समूह नव प्रतिमान ठाढ़ करत।चानक शीतलता आ सुरुजक प्रखरताक संग आगू बढ़ैत रहए तकर कामनाक संग संस्थापिका श्रीमती आरतीकेँ अशेष साधुवाद।
ई त अतीव प्रसन्नता क विषय अछि । सखी बहिनपा एकटा मिशन अछि जाहि में अपन भाषा, साहित्य, संस्कृति इत्यादि बिंदु पर निस्सन काज होईत रहल अछि। अपन समाज केँ विश्वस्तर पर सखी बहिनपा एकटा विशेष पहिचान देलक अछि। अपना सभक सखी बहिनपा एगो सुंदर, सजग, सशक्त आओर संवेदनशील समाजक टेक रखने अछि। आई सखी बहिनपाक वेबसाइट लॉन्च भ रहल अछि, एहि अवसर पर हमर हार्दिक शुभकामना आ मंगलकामना अछि।
सखी- बहिनपा' मैथिलानी समूह द्वारा मैथिली, मैथिलानी तथा मिथिलापर कयल जा रहल काज युग युग स्मरणीय रहत।